Sunday, November 14, 2010

2025 तक लहरों पर तैरेगा 'सपनों का घर'


लंदन।। संत महात्मा बता गए हैं कि इस दुनिया में रहने का असल तरीका यह है कि जैसे कमल का पत्ता पानी बिना
पानी से भीगे तैरता है वैसे ही रहा जाए। बहरहाल, जापान की एक टेक्नॉलजी फर्म को यह आइडिया काफी अच्छा लगा और वह 2025 तक ऐसे शहर बनाने जा रही है जो समुद्र में तैरते हों। ग्रीन फ्लोट नाम के इन शहरों में लगभग एक लाख लोग रह सकेंगे। शिमिजू नाम की इस जापानी फर्म का कहना है कि ग्रीन फ्लोट बनाने की दो वजहें हैं। पहली, कार्बन न्यूट्रल शहर डिवेलप करना मतलब जहां कार्बनिक ईंधन का कम से कम इस्तेमाल हो। कंपनी का दावा है कि इन शहरों में कार्बन इमिशन में 40 तक की कमी हो सकेगी। दूसरा मकसद है ज्यादा से ज्यादा ग्रीन तकनीक को यूज करना। वैसे भी जब ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से समुद्र का जल स्तर तटीय इलाकों और छोटे देशों को डुबो देगा तब पानी के ऊपर पत्ते की तरह तैरते यह शहर ज्यादा कारगर साबित हो सकते हैं। ग्रीन फ्लोट शहर कई छोटे-छोटे हिस्सों या सेल्स से मिलकर बनेगा। ये सेल्स एक किलोमीटर चौड़े होंगे और इनमें 10 से 50 हजार तक लोग रह सकेंगे। हर सेल अपने आप में आजाद होगा और पसिफिक ओशन में इक्वेटर या भूमध्यरेखा के पास तैरेगा। भूमध्यरेखा की लोकेशन इसलिए चुनी गई है क्योंकि यहां समुद्र अपेक्षाकृत शांत रहता है। ये सेल्स चाहें तो आपस में जुड़कर एक शहर बना सकेंगे और बाद में कई शहर जुड़कर एक देश जैसी संरचना में ढल सकेंगे। इस नई और रोमांचकारी दुनिया में अधिकतर लोग 1 किलोमीटर ऊंचे सेंट्रल टावर में रहेंगे। कुछ लोग सेल के किनारों पर बने रिहाइशी इलाकों में रहेंगे। बहुत हल्की मिश्र धातु से बने ये सेंट्रल टावर घास के मैदानों और जंगलों से घिरे होंगे। यहां खाने-पीने की चीजें उगाई जाएंगी, जबकि खुले मैदानों में खेती और पशुपालन किया जाएगा। टावर के आसपास का यह सारा इलाका 7 हजार टन वजन वाले ड्रमों की मदद से बनाया जाएगा।
कंपनी का दावा है कि इन शहरों से बिल्कुल भी गंदगी नहीं निकलेगी मतलब जीरो वेस्ट की स्थिति होगी। हर चीज रीसाइकल होगी और जो चीज रीसाइकल नहीं हो पाएगी उसे ग्रीन तकनीक का यूज करके एनर्जी में बदला जाएगा। अब मुद्दा आता है समुद्र में तैरते इन शहरों की सेफ्टी का। ऊंची-ऊंची समुद्री लहरों से बचाने के लिए इन शहरों के आसपास मजबूत इलास्टिक की परत लगाई जाएगी। इस परत से समुद्री पेड़-पौधे जुड़ें होंगे जो सी लेवल से 30 फीट तक ऊंचे होंगे। एक्सपर्ट का कहना है कि खुले समुद्र में सुनामी का खतरा नहीं है। इसके अलावा आकाशीय बिजली से बचाने के लिए टावर के ऊपर लाइटनिंग रॉड लगी होगी साथ ही टावर की बाहरी दीवार पर लाइटनिंग कंडक्टर की जाली भी बिछी होगी।

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