Saturday, December 18, 2010

एक परिवार, जिसमें सब हैं मुक्केबाज


बागपत, [अमित पंवार]। बागपत में एक परिवार मुक्केबाजी में नित नई गाथा लिख रहा है। पति-पत्‍‌नी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हैं तो उनके तीन बच्चे बॉक्सिंग के महारथियों को मात देकर अपनी उम्र से कई गुना ज्यादा तमगे हासिल कर चुके हैं।मूल रूप से दिल्ली कल्याणपुरी निवासी यशवीर सिंह पांच साल पहले अपने परिवार के साथ यहां आकर बस गए थे। यहां एक स्कूल में नौकरी करते रहे। साथ ही आर्मी के जवानों को बॉक्सिंग के गुर सिखाते रहे। यशवीर सिंह अंतरराष्ट्रीय स्तर के कोच हैं। वहीं उनकी पत्‍‌नी सरिता सिंह अंतरराष्ट्रीय स्तर की मार्शल आर्ट, किक बॉक्सिंग व जीत कुनेड़ो की खिलाड़ी हैं। उनके तीन बच्चे अजय सिंह, विजय सिंह व अन्नू नेशनल स्तर पर खेल रहे हैं।
मिल लीजिए इस परिवार से
यशवीर सिंह-यशवीर सिंह को वर्ष 2003 में उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत ने स्वाभिमान स्पो‌र्ट्स अवार्ड से सम्मानित किया। 2007 में उन्हें अखिल भारतीय कराटे पुरस्कार से नवाजा गया।
सरिता सिंह-मार्शल आर्ट, जीत कुनेड़ो, किक बॉक्सिंग और कराटे में ब्लैक बेल्ट हासिल कर चुकी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी सरिता सिंह प्रदेश स्तर पर 19, नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर दर्जन से अधिक पदक जीत चुकी हैं।
उम्र 12 और तमगे 70-यशवीर सिंह के बडे़ बेटे अजय ने अपनी उम्र से पांच गुने से ज्यादा तमगे हासिल कर चुका है। 8वीं का छात्र अजय स्कूल से लेकर नेशनल लेवल पर अपने पंच का धमाल मचा रहा है।
विजयरथ पर सवार विजय-आठ साल की उम्र और दर्जा तीन का छात्र विजय स्कूल और नेशनल लेवल की प्रतियोगिताओं में लगभग 30 से अधिक पदक अपनी झोली में डाल चुका है।
अन्नू का दम-बॉक्सिंग, मार्शल आर्ट, किक बॉक्सिंग व ताइक्वांडो में अपने-आप को बेहतर खिलाडि़यों की सूची में शामिल करा चुकी कक्षा पांच की छात्रा अन्नू भी नेशनल स्तर पर दर्जनों पदक जीत चुकी है।
नहीं मिली कोई सुविधा-बागपत। बॉक्सिंग का परिवार कहे जाने वाला यशवीर का परिवार आज जिस मुकाम पर है वह सब संसाधनों और सुविधाओं के अभाव में हासिल किया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार या किसी की खेल संघ की ओर से उन्हें कोई सुविधा नहीं मिली है। बागपत में रिंग बनाने के लिए वह कई बार प्रशासनिक अधिकारियों व प्रदेश सरकार से मांग कर चुके हैं पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि अगर रिंग तैयार करा दिया जाए तो अखिल कुमार व विजेंद्र कुमार जैसे सैंकड़ों खिलाड़ी यहां से निकल सकते हैं।

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