Friday, December 17, 2010

आम अरबपति



जिस दुनिया में दौलत का मतलब लक्जरी और चमक-दमक का प्रदर्शन माना जाता हो, वहां सबसे अमीर लोगों की किफायती सादगी हैरान कर देती है। कारोबार में कामयाबी और जीवन में सादगी साथ-साथ चल सकती हैं, यही बताती हैं इन अरबपतियों की ये आम अदाएं..अरबपति कहते ही शानो-शौक़त से भरी जिंदगी आंखों के सामने तैरने लगती है, जहां हर छोटे से लेकर बड़े काम के लिए कर्मचारियों की फौज तैनात रहती है और सुख-सुविधा की हर चीज मांगने से पहले ही हाजिर हो जाती है। लेकिन इसी दुनिया में ऐसे अरबपति भी हैं, जो किसी आम आदमी की तरह जिंदगी जीते हैं, अपने काम करते हैं, रोज काम पर जाते हैं और पैसे भी कमाते हैं। इनमें अनजाने दौलतमंदों से लेकर वे जाने-माने नाम भी शामिल हैं, जो सबसे अमीर लोगों की सूची में शीर्ष पर रहते हैं।मैक्सिको के कालरेस स्लिम दुनिया के सबसे अमीर आदमी हैं और आम आदमी की तरह बर्ताव के मामले में भी वे शीर्ष स्थानों पर होंगे। मैक्सिको के स्टॉक एक्सचेंज के 30 से 40 फ़ीसदी हिस्से को संचालित करने वाले स्लिम हाल तक प्लास्टिक की घड़ी पहनते थे। 60.6 अरब डॉलर, यानी 2,725 अरब रुपए की भारी-भरमकम संपत्ति वाले स्लिम ने अपना मासिक वेतन 24 हजार डॉलर (लगभग 11 लाख रु.) तक सीमित रखा है, हालांकि उनकी वर्तमान दौलत के आधार पर अनुमान है कि अगर वे हर मिनट 51 हजार रु. भी ख़र्च करें, तो अगले सौ साल तक बैठे-बैठे खा सकते हैं।कालरेस अब भी लोकल ट्रेन में सफ़र कर लेते हैं। इसी तरह ब्रिटिश उद्यमी जॉन कॉडवेल, 1.1 अरब डॉलर नेटवर्थ वाले डेविड चेरिटन और चक फीनी (8 अरब डॉलर) भी शहर में आने-जाने के लिए पैदल चलने या बाइक अथवा पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्राथमिकता देते हैं। हालांकि अगर ये चाहें, तो लंच पर घर आने के लिए हेलीकॉप्टर हायर कर सकते हैं या लक्जरी कारों की क़तार लगा सकते हैं। कॉडवेल और चेरिटन तो अपने बाल भी ख़ुद काटते हैं।सामान्य जीवन के मामले में इन्फोसिस के संस्थापक नारायण और सुधा मूर्ति भी कोई कम नहीं। वे घर के कामों के लिए नौकर रखना पसंद नहीं करते और अपने काम ख़ुद ही करते हैं। बॉम्बे डाइंग के नुस्ली वाडिया अपना खाना ख़ुद ही पकाना पसंद करते हैं। बजाज मोटर्स के राहुल बजाज डिजाइनर सूट की बजाय चूड़ीदार कुर्ता-पैजामा और सेवंटीज के दौर के सफ़ारी सूट को प्राथमिकता देते हैं। सिर्फ़ ये पुराने पैसेवाले ही नहीं, फेसबुक के संस्थापक, 26 वर्षीय मार्क जकरबर्ग जैसे युवा दौलतमंद भी दिखावे से दूर रहते हैं। वे कैलिफोर्निया में एक किराए के मकान में अपनी गर्लफ्रेंड प्रीशिला चान के साथ रहते हैं।मकान कोई ख़ास बड़ा नहीं है। उनके स्टडी रूम में बस तीन कुर्सियां, एक टेबल और दो अलमारियां हैं। उनके छोटे से किचन में लकड़ी का एक कैबिनेट भर है। जहां तक घर की बात है, तो एक ओर जहां मुकेश अंबानी ने चर्चाओं के अनुसार, 9,000 करोड़ रुपए के ख़र्च से नया घर बनवाया है, वहीं वारेन बफ़ेट उसी तीन बेडरूम वाले घर में रह रहे हैं, जिसे उन्होंने 1957 में महज 31,500 डॉलर में ख़रीदा था। कालरेस स्लिम भी 40 साल से एक ही घर में रह रहे हैं।बहरहाल, 47 अरब डॉलर (2,113 अरब रु.) की नेटवर्थ वाले वारेन बफ़ेट की कहानी सबसे अलग लगती है, जिन्होंने अपनी पूरी संपत्ति दान करने की घोषणा कर दी है। लोग उनकी किफायत को कंजूसी कहते हैं, लेकिन अगर यह ‘कंजूसी’ समाज के हित के लिए है, तो इससे अच्छी बात भला क्या हो सकती है! बफ़ेट जहां भी जाते हैं, अपनी कार ख़ुद चलाते हुए जाते हैं। उन्होंने न तो ड्राइवर रखा है, न ही सुरक्षा के लिए कोई तामझाम बना रखा है। उन्होंने अपने घर के चारों ओर कोई दीवार या बाड़ तक नहीं बनवाई है। वे पार्टियों में भी नहीं जाते। इसकी बजाय, घर पहुंचने के बाद वे आमतौर पर अपने लिए पॉपकॉर्न बनाते हैं और टीवी देखते हैं। एक और हैरानी की बात : प्राइवेट जेट कंपनी के मालिक बफ़ेट कभी भी प्राइवेट जेट में सफ़र नहीं करते। वे अपने साथ सेलफोन नहीं रखते और न ही उनकी डेस्क पर कंप्यूटर रखा मिलेगा।ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ पश्चिमी उद्यमी ही सादगी पसंद करते हैं। भारतीय या भारतीय मूल के दौलतमंद भी इस मामले में पीछे नहीं हैं। लैंडमार्क ग्रुप के सर्वेसर्वा मिकी जगतियानी खाड़ी में रिटेल किंग कहे जाते हैं। उनके पास 23 बड़े ब्रांड और 15 देशों में 900 स्टोर हैं। उनके लिए 31 हजार लोग काम करते हैं और वे लगभग 117 अरब रुपयों की दौलत के मालिक हैं। मिकी कहते हैं कि वे गांधी जी की तरह जीवन जीना पसंद करते हैं। वे जमीन पर सोते हैं, अपने ऑफ़िस, दराज, घर, कहीं भी ताला नहीं लगाते। वे सिर्फ़ एक ही कार चलाते हैं, हालांकि वे चाहें, तो याट और जेट भी ख़रीद सकते हैं। जगतियानी अनाथालय में पले हैं, इसलिए वे जब भी भारत आते हैं, अनाथालयों में जाते हैं और जमीन पर सोते हैं। उन्होंने झुग्गी बस्तियों के स्कूलों में पढ़ने वाले एक लाख से ज्यादा बच्चों की शिक्षा के लिए फंड बनाया है।सादगी और समाजसेवा के क़िस्से और भी हैं। मसलन, यूनिवर्सिटी ऑफ़ टे?सास के 76 वर्षीय जर्नलिज्म प्रोफेसर जीन बर्ड ने दस लाख डॉलर, यानी क़रीब साढ़े चार करोड़ रु. से ज्यादा दान किए हैं, लेकिन वे काम पर जाने के लिए हर दिन छह मील पैदल चलते हैं। वे एक छोटे से अपार्टमेंट में रहते हैं और कहा जाता है कि कचरे के डि?बे में फेंके गए जूते उठाकर पहनते हैं। विप्रो के अजीम प्रेमजी ने 8,846 करोड़ रु. के शेयर दान किए हैं, लेकिन अब भी वे बिजनेस टुअर के दौरान कंपनी के गेस्ट हाउस में ही ठहरते हैं। कहते हैं कि उनके बेटे की शादी की दावत में खाना काग़ज की प्लेटों पर परोसा गया था।ये वे दौलतमंद हैं, जो सिंपल लाइफ़ पसंद करते हैं, पर कुछ अमीरों की आदतें तो इस क़दर हैरान कर देने वाली हैं कि उन्हें कंजूसों की श्रेणी में भी रखा जा सकता है। दुनिया के सातवें अमीर आदमी, स्वीडन के इंग्वार कैंप्राड को देखकर लगता है कि तंगहाली में जीवने गुजारने वाला कोई बुजुर्ग है। उनकी कंपनी आइकिया दुनिया में सबसे ज्यादा मुनाफ़ा कमाने वाली फर्नीचर रिटेल चेन है, जिसके 35 देशों में 278 स्टोर हैं। बावजूद इसके वे अपना खाना ख़ुद ही पकाते हैं और जब भी बाजार जाते हैं, जमकर मोलभाव करते हैं। वे 15 साल पुरानी वोल्वो चलाते हैं और सूट पहनने से बचते हैं। वालमार्ट के हिस्सेदार जिम वाल्टन 14 साल पुरानी डॉज डेकोटा चलाते हैं, जबकि उनकी नेटवर्थ 737 अरब रु. है। रिटेल टायकून फ्रेडरिक मेइजर दो अरब डॉलर की दौलत के स्वामी हैं, लेकिन जहां भी जाते हैं, सस्ते होटल खोजते हैं। जॉन कॉडवेल फ़ैशन से बाहर हो चुके कपड़े ख़रीदते हैं।

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