Friday, November 12, 2010

वर्तमान में जिएं, खुश रहेंगे

बोस्टन। वर्तमान को छोड़कर भूत और भविष्य की चिंता करना ही जीवन की परेशानियों का कारण है। इस बात पर वैज्ञानिकों ने भी मोहर लगा दी है।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक इंसान अपनी जागृत अवस्था का 47 प्रतिशत उन चीजों के बारे में सोचने में बिताता है जो घिटत हो चुकी हैं या भविष्य में जिनके घटने की वह कल्पना करता है। यही चिंता उसकी परेशानियों का सबब बन जाती है।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के मनोचिकित्सक मैथ्यू किलिंग्सवर्थ और डेनियल गिलबर्ट ने बताया,'इंसान का दिमाग सोचता रहता है और यही अवस्था उसकी खुशी को छीन लेती है।'
उन्होंने कहा,'जो हो नहीं रहा है उसके बारे में सोच कर भावनात्मक कीमत अदा करनी पड़ती है।' इस शोध के लिए इसमें 18 से 88 आयु वर्ग के बीच के करीब ढाई हजार लोगों पर अध्ययन किया गया।
शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों से पूछा गया कि वे कितना खुश थे, खुशी के इन क्षणों में वे क्या कर रहे थे? उस समय वे अपनी मौजूदा गतिविधि के बारे में सोच रहे थे या किसी अन्य खुशी, नाखुशी या तटस्थ भाव वाले विचार में मगन थे।
46.9 प्रतिशत प्रतिभागियों ने बताया उनका दिमाग इधर उधर दौड़ रहा था, 30 फीसदी बेकार के विचारों में मशगूल थे लेकिन साथी से प्रेम भरी बातें करते समय उनका दिमाग वर्तमान में था। किलिंग्सवर्थ तथा गिलबर्ट ने पाया कि प्यार, कसरत और आपसी वार्तालाप के समय लोग सर्वाधिक खुश होते हैं लेकिन आराम, काम करते समय या घर में कंप्यूटर पर काम करते वक्त वे सबसे कम खुश होते हैं।

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